‘कामायनी’ जैसे अनन्य महाकाव्य के रचनाकार जयशंकर प्रसाद ने कथा-लेखन में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई थी। प्रेमचन्द के समकालीन कहानीकारों में यह प्रसाद ही थे, जिनकी कहानियों की विशिष्टता को रेखांकित करने के लिए विद्वानों ने ‘प्रसाद-स्कूल’ पद का प्रयोग किया। गौरतलब है कि प्रसाद की कहानियों की भाषा में हमें उनके कवि की छाया स्पष्ट दिखाई पड़ती हैं, लेकिन उसका आधार यथार्थ ही है। ये कहानियाँ आज भी उतनी प्रांसगिक है, जितनी लिखी जाते समय थीं। इन्हें पढ़ना न सिर्फ एक महान लेखक की रचनात्मकता से रू-ब-रू होना है, बल्कि हिन्दी कहानी के विकास के आरंभिक चरण साक्षात्कार करना भी है।
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Jayshankar Prasad Ki Sarvshreshth Kahaniyan जयशंकर प्रसाद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
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‘कामायनी’ जैसे अनन्य महाकाव्य के रचनाकार जयशंकर प्रसाद ने कथा-लेखन में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई थी। प्रेमचन्द के समकालीन कहानीकारों में यह प्रसाद ही थे, जिनकी कहानियों की विशिष्टता को रेखांकित करने के लिए विद्वानों ने ‘प्रसाद-स्कूल’ पद का प्रयोग किया। गौरतलब है कि प्रसाद की कहानियों की भाषा में हमें उनके कवि की छाया स्पष्ट दिखाई पड़ती हैं, लेकिन उसका आधार यथार्थ ही है। ये कहानियाँ आज भी उतनी प्रांसगिक है, जितनी लिखी जाते समय थीं। इन्हें पढ़ना न सिर्फ एक महान लेखक की रचनात्मकता से रू-ब-रू होना है, बल्कि हिन्दी कहानी के विकास के आरंभिक चरण साक्षात्कार करना भी है।











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