प्रसिद्ध उपन्यासकार शरतचंद्र का सर्वाधिक चर्चित उपन्यास है- ‘देवदास’, जिस पर विभिन्न भाषाओं में कई फिल्में बन चुकी हैं। ‘देवदास’ की लोकप्रियता का अंदाज तो इसी से लगाया जा सकता है कि उस का नायक देवदास आज असफल प्रेम के गम में डूबे किसी भी प्रेमदीवाने का पर्याय बन चुका है। देवदास ही क्यों, चंद्रमुखी और पारो भी कम चर्चित नहीं रही हैं।
‘देवदास’ की इस लोकप्रियता का कारण केवल सुगठित प्रेमकथा, नपेतुले शब्दों या जीवनव्यापी घटनाओं के कारण नहीं है बल्कि परंपरागत सामाजिक बंधनों, हीन भावनाओं और सामाजिक दुर्बलताओं के मायाजाल से निकाल कर हिदू समाज, विशेषतया नारियों को उदार एवं व्यापक दृष्टि प्रदान करना भी है। संभवतया इसीलिए वह भारतीय रचनाकारों की पहली पंक्ति में गिने जाते हैं।
शरतचंद्र की यह भी एक विशेषता है कि वह अपने उपन्यासों में सामाजिक या राजनीतिक समस्याओं का तानाबाना बुनते समय अपनी रोमानी प्रवृत्ति की छाप अवश्य छोड़ देते हैं। क्या आप सात्विक प्रेम और उस की मर्मस्पर्शी संवेदना की व्यथाकथा नहीं पढ़ना चाहेंगे?
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Devdas (देवदास)
₹160.00
प्रसिद्ध उपन्यासकार शरतचंद्र का सर्वाधिक चर्चित उपन्यास है- ‘देवदास’, जिस पर विभिन्न भाषाओं में कई फिल्में बन चुकी हैं। ‘देवदास’ की लोकप्रियता का अंदाज तो इसी से लगाया जा सकता है कि उस का नायक देवदास आज असफल प्रेम के गम में डूबे किसी भी प्रेमदीवाने का पर्याय बन चुका है। देवदास ही क्यों, चंद्रमुखी और पारो भी कम चर्चित नहीं रही हैं।
‘देवदास’ की इस लोकप्रियता का कारण केवल सुगठित प्रेमकथा, नपेतुले शब्दों या जीवनव्यापी घटनाओं के कारण नहीं है बल्कि परंपरागत सामाजिक बंधनों, हीन भावनाओं और सामाजिक दुर्बलताओं के मायाजाल से निकाल कर हिदू समाज, विशेषतया नारियों को उदार एवं व्यापक दृष्टि प्रदान करना भी है। संभवतया इसीलिए वह भारतीय रचनाकारों की पहली पंक्ति में गिने जाते हैं।











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